हे नारी तुम सब पर भारी। हे नारी तुम सब पर भारी।
आदर मिला है हृदय खोलकर। मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर। आदर मिला है हृदय खोलकर। मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर।
अहिल्या हूँ, अपने चरणों से छू लो, मेरा वजूद मुकम्मल कर दो अहिल्या हूँ, अपने चरणों से छू लो, मेरा वजूद मुकम्मल कर दो
जैसे इन्द्र के छल से सती अहिल्या पाषाण हो गई थी। जैसे इन्द्र के छल से सती अहिल्या पाषाण हो गई थी।
हर शब्द को निशब्द कर दे ऐसी लड़ी थी, लगता है जैसे शत्रु रक्त की प्यास बड़ी थी। हर शब्द को निशब्द कर दे ऐसी लड़ी थी, लगता है जैसे शत्रु रक्त की प्यास बड़ी ...
अपनी अनोखी छटा बिखरे प्रकृति ओर भी मनोहर लगने लगी है। अपनी अनोखी छटा बिखरे प्रकृति ओर भी मनोहर लगने लगी है।